मंगलवार, 24 जुलाई 2012

चार लाइन दोस्तों के नाम


रूत बदल गए इंतजार में तेरी, 
आई न तुझे याद मेरी,
क्या लिखू मैं, ऐ पगामे मुहब्बत, 
जाती ही नहीं याद तेरी.

सोमवार, 23 जुलाई 2012

अल्फाज तो बहुत हैं


अल्फाज तो बहुत हैं मोहब्बत जताने के लिए, 
मगर वो उल्फत कहाँ से लाउ सनम का दिल चुराने के लिए. 
आहे हर वक्त रहती हैं सासों में दबी, 
कभी आये वो घूँघट में हमें आपना बनाने के लिए.







मंगलवार, 10 अप्रैल 2012

यूँ न नज़रे झुकाव

यूँ न नज़रे झुकाव, की तुम्हे देकने का दिल करता है।
सागर की लहरों को तान बना, आज फिर गुनगुनाने का दिल करता है।
वफाये मोहब्बत की सरारत ही सही, आज हद गुजर जाने का दिल करता है।

यूँ न नज़रे झुकाव...................
   

शनिवार, 17 दिसंबर 2011

तेरे दर से जब मुहबत का जनाजा निकला

तेरे दर से जब मुहब्बत का जनाजा निकला,
दुल्हन परी दूल्हा शहजादा था,
महफिल में रौनक, शहनाई में तान था,
न आह आई, न कसक ही गई,
मद मस्त उस समां में एक चेहरा तनहा अकेला था,
हर मुखरा अपसरा, दिल मिट्टी का खिलौना था,
आ रही हर यादों में बस एक नाम तेरा था,
तेरे दर से जब मुहबत का जनाजा निकला.......





शनिवार, 1 अक्टूबर 2011

वो ओठ

बहुत कुछ बोल रहे थे वो ओठ,
गुल का, गुलशन का इबादत कर रहें थे वो ओठ|
अनजानी, अन्दाखी चाहत का,
हर कलि का, हर चमन का,
हलकी हलकी मीठी रस की फुहार का एहसास थे वो ओठ|
दूध धूलि सी छुई मुई सी,
योवन की अंगराई थे वो ओठ|
कोमल, नजाकत, शरारत से भरी,
छिपी  पड़ी थी जिसमे मस्ती सारी,
मुस्कराहट से न जाने क्या क्या राग सुना रहें थे  वो ओठ|
मराठी शबाब में नहाये एक राज्यस्थानी की पहचान थे वो ओठ|

शुक्रवार, 23 सितंबर 2011

जिन्दगी की कमी

फटेहाल इस जिन्दगी में , बस इन गमो की कमी थी,
लहू बनके जो निकले उन आसुओ की कमी थी,

कमी थी उन यादो की जिनके बिना जिन्दगी मदहोश हो चली थी,
ख़ामोशी से जो नया राह दिलाये,
बस एक  ऐसे एहसास की कमी थी,
फटेहाल इस जिन्दगी में, ......

गुरुवार, 4 अगस्त 2011

वो चार दिन

सावन की पहली बूंदों ने गुनगुनाने की चाहत जगाइ थी
चढ़ते दिन और ढलती शामो ने भी नए उमंग जगाये थे
वो चार दिन न जाने क्या क्या एहसास दिलाये थे|

सूर्य की तपिस मैं ठंडक चाँद की चांदनी में गरमाहट,
हर सास हर धड़कन में किसी मिलने को आवाज उठाये थे,
वो चार दिन न जाने क्या क्या एहसास दिलाये थे|

हर पल बदले अंदाज,
सासों को साँसों से मिलने का इंतजार,
हर फूल हर कलियों में किसी का चेहरा नजर आये थे
वो चार दिन न जाने क्या क्या एहसास दिलाये थे|

भूले न भुलेगे कभी इन आँखों में ख़ुशी का एहसास
मंद मंद चलती साँसों कोमल मखमली आँचल का एहसास
न भुलेगे वो चार दिन जो नए जीवन का एहसास दिलाये थे
वो चार दिन न जाने क्या क्या एहसास दिलाये थे|