फटेहाल इस जिन्दगी में , बस इन गमो की कमी थी,
लहू बनके जो निकले उन आसुओ की कमी थी,
कमी थी उन यादो की जिनके बिना जिन्दगी मदहोश हो चली थी,
ख़ामोशी से जो नया राह दिलाये,
बस एक ऐसे एहसास की कमी थी,
फटेहाल इस जिन्दगी में, ......
किसी को अपना बनाने की चाह मे मैने , ये जहा पा लिया !
फूल न मिले तो क्या, काटो का शहरा बना लिया !
हर आंधी हर तूफान से लड्रते,अंधेरो मे प्रकाश को खोजते , जीवन मे योही बढते,
साबन न आये तो क्या पतझर संग गुनगुना लिया !
हर एक पल, हर एक हसी को याद करते, उठते, बैठते, सोते, जागते, खवाब देखते,
सच न हुये तो क्या, जूठे इन खवाबो मे ये जहा पा् लिया !
किसी को अपना बनाने की चाह मे मैने , ये जहा पा लिया !